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Dr. Yogesh Vyas

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घर में अशांति यानि ग्रह और वास्तु दोष (Discord in the home signifies planetary and Vastu defects)

आज कई घरों में भौतिक सुख, सुविधा होने के बाद भी शांति की कमी देखने को मिल रही है। बिना वजह तनाव, क्रोध, अशांति और परिवार में दूरियां भी बढ़ती जा रही हैं। ज्योतिष और वास्तु के अनुसार जब कुंडली के ग्रह और वास्तु की दिशाएं अशुभ हो जाएं तब घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होने लगती है। व्यक्ति चाहे जितना भी दौलत और शोहरत कमा ले लेकिन यदि घर के अंदर आते ही उसकी मानसिक शांति और सुकून कपूर की तरह उड़ जाते हैं तो कुंडली के ग्रह और वास्तु के बड़े दोष आपके घर के चेन और सुकून को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। आइए इस वीडियो में जानते हैं कि ज्योतिष और वास्तु के कौनसे ग्रह, विशेष योग और प्रबल वास्तु दोष आपके घर के सुखद माहौल को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।
घर की शांति बिगाड़ने वाले ग्रह और भाव-

● चतुर्थ भाव- ज्योतिष के अनुसार कुंडली का चौथा घर हमारे घर की शांति, पारिवारिक सुख और माता से जुड़ा माना जाता है। जब कुंडली के क्रूर ग्रह इस चतुर्थ भाव पर हमला करते हैं तो महल जैसा घर भी हमें सुख और शांति नहीं दे पाता। चतुर्थ भाव में जब राहु, मंगल, शनि या सूर्य जैसे ग्रह पाप अन्य पाप ग्रहों से युक्त या दृष्ट होकर बैठते हैं तो आपको अपने बेहद शानदार घर में भी मानसिक शांति और सुकून में कमी देखने को मिलती है। इसलिए चतुर्थ भाव से संबंधित ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य पूजा घर में स्थापित करना चाहिए।
● मंगल ग्रह- ज्योतिष में मंगल ग्रह को उग्रता, विवाद, क्रोध और आक्रामकता का कारक ग्रह माना जाता है। यदि मंगल ग्रह शनि, राहु या केतु के प्रभाव में आ जाए और उसका लग्न या चतुर्थ भाव से भी संबंध बन जाए तो व्यक्ति को व्यर्थ का गुस्सा, पति-पत्नी में विवाद, अनावश्यक आक्रामकता एवं भाइयों से सामंजस्य में भी कमी देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में मूंगा रत्नों से युक्त हस्त निर्मित मंगल ग्रह का वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● राहु ग्रह- राहु ग्रह अचानक विवाद, मानसिक अशांति, भ्रम और उग्रता वाला ग्रह माना जाता है। कुंडली में यह अन्य पाप ग्रहों से यति करके लग्न या चतुर्थ भाव से संबंध बनाता है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को मानसिक अशांति, व्यर्थ का भटकाव, बिना वजह झूठ और भ्रम, परिवार से दूरी, अचानक झगड़ा होने की समस्या आदि देखने को मिलते हैं। ऐसी स्थिति में गोमेद रत्नों से युक्त राहु ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● शनि ग्रह- ज्योतिष में खराब शनि ग्रह रिश्तो में ऊर्जा की कमी, मानसिक दवाव, अपने लोगों से दूरी और मन पर एक बोझ के साथ ही जीवन में संघर्ष देने वाला ग्रह माना गया है। कुंडली में जब शनि ग्रह अन्य पाप ग्रहों से पीड़ित होकर लग्न,पंचम भाव या चंद्रमा से संबंध बनाता है तो ऐसी स्थिति में जीवन में ऊर्जा की कमी, मन में उदासी, लोगों से अलगाव, मानसिक तनाव और वार्तालाप की कमी भी देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में नीलम रत्नों से युक्त शनि ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● केतु ग्रह- ज्योतिष में केतु ग्रह अलगाव, लोगों से दूरी एवं व्यक्ति को मानसिक तनाव देने वाला ग्रह माना जाता है। जब केतु ग्रह अन्य पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट होकर लग्न या चतुर्थ भाव से संबंध बनाता है तो अचानक रिश्तो में शिथिलता, परिवार से दूरी, अकेलेपन का एहसास और भ्रम की स्थिति भी देखने को मिल सकती है। ऐसा होने पर लहसुनिया रत्नों से युक्त केतु ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए। प्रमुख ग्रह योग जो घर का माहौल बिगाड़ते हैं-
● अंगारक योग- जब कुंडली के लग्न, चतुर्थ या सप्तम भाव में मंगल के साथ में राहु अथवा केतु की युति होती है तो इस अंगारक योग के कारण छोटी सी बात पर बड़ा विवाद, व्यर्थ का गुस्सा, अनावश्यक झगड़े, हिंसक वातावरण और घर परिवार एवं दांपत्य जीवन में अनावश्यक तनाव देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में अंगारक योग का ओरिजिनल रत्नों से युक्त हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● अग्नि योग- कुंडली में जब शनि ग्रह मंगल से युक्त अथवा दृष्ट होकर लग्न, चतुर्थ या सप्तम भाव में स्थित होता है तो मानसिक तनाव, व्यर्थ का विवाद और उस व्यक्ति में दबा हुआ क्रोध भी देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में अग्नि योग का ओरिजिनल रत्नों से युक्त हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● विष योग- ज्योतिष में चंद्रमा मन का और शनि दुख का कारक है। जब ये दोनों ग्रह लग्न, चतुर्थ, पंचम या सप्तम भाव में युति अथवा दृष्टि संबंध बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में लोगों से बातें कम करना, घर में उदासी, साइलेंट डिप्रेशन और नकारात्मक माहौल भी देखने मिल सकता है। ऐसा होने पर ओरिजिनल रत्नों से युक्त विष योग का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● पितृ दोष- कुंडली में जब सूर्य या चंद्रमा का राहु अथवा केतु से डायरेक्ट संबंध चतुर्थ, पंचम, नवम या दशम भाव में बनता है तो इस पितृ दोष के कारण व्यर्थ की बातों से घर में क्लेश, मानसिक तनाव, वैवाहिक जीवन में परेशानी और वंश वृद्धि की समस्या भी देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में ओरिजिनल रत्नों से युक्त पितृ दोष का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित करना चाहिए।
● घर में अशांति देने वाले प्रमुख वास्तु दोष- यदि घर के ईशान कोण में शौचालय, सैप्टिक टैंक अथवा भारी कंस्ट्रक्शन कर दिया गया हो इसी प्रकार से दक्षिण पश्चिम वाले राहु के कोण में गहरा गड्ढा, सेप्टिक टैंक, पानी का कुंआ, बोरवेल, टॉयलेट या मेन गेट का निर्माण कर दिया गया हो, इसी प्रकार से घर के आग्नेय कोण में सेप्टिक टैंक, टॉयलेट, पानी की टंकी, बोरवेल, नल की फिटिंग आदि का निर्माण कर दिया गया हो तो पारिवारिक और दांपत्य जीवन में विवाद, संतान की उन्नति में बाधा और मानसिक बेचैनी एवं परिवार में सामंजस्य की कमी देखने मिल सकती है।
● हमारा घर हमारी सबसे बड़ी ढाल है। इसे व्यर्थ के विवादों का अखाड़ा मत बनने दीजिए। यदि ज्योतिष और वास्तु से संबंधित आपका भी कोई प्रश्न है तो आप हमसे मैसेज के माध्यम से पूछ सकते हैं।

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✍️Dr Yogesh Kr Vyas_ Astrologer,
yotishacharya _Topper,
NET (Astrology & Sahitya),
PH.D. In Astrology
ASTRO Vyas Ji,
Kaveri Path, Mansarovar, Jaipur
Mob- 8058169959

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