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Dr. Yogesh Vyas

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वास्तु अनुरूप जल संग्रह (Vastu Compliant Water Collection)-

भूमि चयन के बाद भवन निर्माण सुचारू रूप से चल सके इसके लिए जल की व्यवस्था करना ही प्राथमिक आवश्यकता होती है। भवन की उत्तर दिशा, पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में जल की व्यवस्था करनी चाहिए। भवन की इन दिशाओं में कोई तालाब, कुआं या बहता हुआ दरिया हो तो उस घर में धन, समृद्धि और सम्मान बना रहता है। इन दिशाओं में नल, ट्यूबेल या अंडर ग्राउंड पानी का टैंक बनवाने पर गरीबी, बीमारी, धन संबंधी रुकावटें समाप्त होती हैं और व्यक्ति कर्ज वा मुकदमे आदि की समस्याओं से भी मुक्त होने लगता है। घर के अंदर ईशान कोण में पीने का घड़ा या बर्तन में रखे पानी को परिवार के सदस्यों द्वारा पीने पर उनको स्वास्थ्य लाभ, सुख, संपदा और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुआं, हैंडपंप या पानी का टैंक जब दक्षिण दिशा में स्थित हो तो उस भवन में निवास करने वाली स्त्रियों को कई प्रकार के शारीरिक कष्ट व आपस में मतभेद बने ही रहते हैं। यहां ग्रह स्वामी की पत्नी को विशेष परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दक्षिण में जल का भंडारण होने पर घर में अचानक दुर्घटनाएं और मृत्यु की समस्या भी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में पूजा घर में हस्तनिर्मित मंगल का वैदिक यंत्र लगाना चाहिए।

इसी प्रकार से जल का भंडारण वायव्य कोण यानि उत्तर- पश्चिम दिशा में करने पर गृह स्वामी को अक्सर चोरी का भय, व्यर्थ का कलह एवं शत्रु पीड़ा संभावित होती है। ऐसे में पूजा घर में वायव्य दोष निवारक यंत्र लगाना चाहिए। नैऋत्य यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा में जल का भंडारण करने पर उस घर के लोगों को असाध्य बीमारी, दुर्घटनाएं, धन की कमी व परिवार में भी खराब माहौल देखने को मिलता है। इस दोष के समाधान हेतु पूजा घर में नैऋत्य दोष निवारक यंत्र लगाना चाहिए। अग्नि कोण यानि दक्षिण -पूर्व दिशा में में पानी का भंडारण करने पर संतान, धन एवं प्रतिष्ठा को नुकसान, कर्ज एवं स्त्रियों को कष्ट मिलने की संभावना बनती है। अग्नि कोण के दोष समाधान हेतु पूजा घर में अग्नि दोष निवारक यंत्र लगाएं। इसी प्रकार पश्चिम दिशा में जल का भंडारण होने पर पुरुष रोगी एवं उनको पेट संबंधी समस्याएं देखने को मिलती है। ऐसे में पूजा घर में शनि का वैदिक यंत्र लगाना चाहिए। घर के ब्रह्म स्थान यानि कि मध्य भाग को नीचा करके वहां जल भंडारण की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने पर धन एवं कारोबार में समस्या के साथ ही कर्ज, धोखा एवं मुकदमे जैसी स्थिति भी देखने को मिल सकती है। ब्रह्मस्थान में ऐसा दोष होने पर पूजा घर में रत्न जड़ित संपूर्ण वास्तु यंत्र अवश्य लगाना चाहिए।

आज बहुमंजिला इमारतों का समय है इसलिए घर की छत पर पानी की टंकियां नैऋत्य दिशा यानि कि दक्षिण- पश्चिम कोने में रखनी चाहिए। इस प्रकार आप भी वास्तु अनुरूप अपने घर में जल का भंडारण करके सुख, शांति, समृद्धि, प्रसिद्धि और दीर्घायु को प्राप्त कर सकते हैं।

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