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वास्तु शास्त्र में रंगों का महत्व
हमारे दैनिक जीवन में रंगों के महत्व की बात करें तो सही जगह पर सही रंगों का प्रयोग करने से जीवन में
खुशियां, शांति, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिलती है। वास्तु शास्त्र का मूल सिद्धांत ऊर्जा है
और इस ऊर्जा को सही रंगों के इस्तेमाल से दैनिक जीवन में बढ़ाया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति के घर और
ऑफिस में किए गए रंगों से उत्पन्न ऊर्जा का प्रभाव निश्चित रूप से उसके जीवन में देखने को मिलता है।
वास्तु शास्त्र में रंगों और कलाकृतियों का उपयोग किसी भी स्थान की ऊर्जा को बेहतर बनाने के लिए
शक्तिशाली माध्यम के रूप में किया जाता है और वास्तु में इन रंगों के माध्यम से घर के कई दोषों का उपचार
भी किया जाता है जैसे कि जब आप किसी प्राकृतिक वातावरण में प्रवेश करते हैं तो उस समय आपको काफी
शांति और सुकून महसूस होता है क्योंकि उस जगह पर रंगों का संतुलन बना हुआ है लेकिन जब आप किसी
अंधेरी जगह में जाते हैं तो आपको डर और बेचैनी के साथ ही अकेलापन भी महसूस होता है क्योंकि वहां पर
सकारात्मक रंगों का अभाव है। इसी प्रकार से जव आप किसी ऐसे घर में प्रवेश करते हैं जिसकी दीवारों का रंग
पीला है या क्रीम कलर है तो उस जगह पर आपको शांति और खुशी का एहसास होगा और जब आप ऐसे घर में
प्रवेश करते हैं जहां पर नीले, मेहरून या ग्रे जैसे गहरे रंग हो तो वहां पर आपकी मानसिक स्थिति कुछ अलग ही
नजर आएगी। इसलिए कह सकते हैं कि घर और ऑफिस में सही रंगों का प्रयोग निश्चित रूप से व्यक्ति के
जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को कम करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है।
विभिन्न प्रकार के रंगों के संपर्क में आने से व्यक्ति की भावनाओं और शारीरिक एवं मानसिक स्थिति में भी
बदलाव देखने को मिलता है। वास्तु के अनुसार आसपास का वातावरण और उसके रंग हमारे जीवन को
प्रभावित करते हैं। दीवारों के रंग और पेंटिंग या तो आपके आराम के लिए अनुकूल साबित होंगी या फिर आपकी
मानसिक स्थिति में असहजता ला देंगे, जिससे कि आपको तनाव महसूस होगा। वास्तु के नियमों से युक्त रंगों
वाला घर निश्चित रूप से शांति, सुकून और उन्नति देने के साथ ही आपके जीवन के तनाव को भी कमता है।
घर में रंगों के चुनाव में पंच तत्वों की भूमिका
घर में जब वास्तु के अनुरूप रंगों का चयन करते हैं तो आपको इस बात का निश्चित रूप से ध्यान रखना चाहिए
कि वे रंग अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल और आकाश इन सभी पांच तत्वों के साथ संतुलन स्थापित कर सकें। आप
देखेंगे कि निश्चित रूप से रंगों के इस संतुलन का आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उन्नति के साथ
ही आपको अपने सौभाग्य में भी वृद्धि देखने को मिलेगी।
● 1 अग्नि तत्व- आग्नेय कोण से जुड़ा हुआ है और वास्तु में अग्नि कोण का स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है।
● 2 पृथ्वी तत्व- को साउथ वेस्ट यानि कि नैऋत्य कोंण से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु शास्त्र में नैऋत्य
कोंण का स्वामी राहु ग्रह को माना गया है। इस कोण में पीले या मिट्टी जैसे रंगों का भी प्रयोग किया जा सकता
है।
● 3 वायु तत्व- वायव्य कोण से जुड़ा हुआ है। वास्तु शास्त्र में इस वायव्य कोण का स्वामी चंद्र ग्रह को माना
गया है। घास के जैसे हरे रंग, सफेद, क्रीम और हल्के रंगों का प्रयोग यहां करना चाहिए।
● 4 जल तत्व- उत्तर, ईशान और पूरब दिशा से जुड़ा हुआ है। वास्तु शास्त्र में बुध, गुरु और सूर्य ग्रह इन तीनों
दिशाओं के स्वामी माने गए हैं। समुद्री नीले या फिर घास के जैसे हरे रंग का प्रयोग इन दिशाओं में किया जा
सकता है। यह रंग व्यक्ति के जीवन में विश्राम और शांति के प्रतीक हैं। इन रंगों का उपयोग आप बाथरूम के
साथ ही बेडरूम मैं भी कर सकते हैं।
● 5 आकाश तत्व- के लिए सफेद रंग, क्रीम और हल्के रंगों का प्रयोग करना उचित माना जाता है। आप इन
रंगों का प्रयोग लिविंग रूम के प्रवेश द्वार के साथ ही योग और ध्यान कक्ष जैसे स्थानों पर भी कर सकते हैं।
ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में आकाश तत्व के साथ में अच्छा तालमेल स्थापित होने पर काफी
सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
वास्तु के अनुसार बच्चों के कमरे का रंग
वास्तु के अनुसार बच्चों के स्टडी रूम में सही रंगों के चुनाव के लिए अन्य चीजों की तरह ही रंगों को लेकर भी
काफी सावधानी रखने की आवश्यकता होती है, स्टडी रूम में सावधानी से रंगों का चुनाव करने से बच्चों की
बौद्धिक क्षमता में निश्चित रूप से वृद्धि दिखाई देगी। बच्चे का विवेक भी आपको मजबूत होता हुआ दिखाई
देगा इसके साथ ही बच्चे की जो स्मरण शक्ति है वह भी निश्चित रूप से अच्छी होगी।
● वास्तु के मुताबिक बच्चों के स्टडी रूम में हल्का पीला, हल्का गुलाबी या हल्का हरा रंग करवाना काफी शुभ
माना जाता है। बच्चों के कमरे में पीला रंग करने पर यह बच्चों के मूड को संतुलित करता है और उनकी
एकाग्रता को भी बढ़ाता है। पीला रंग विद्या का भी प्रतीक माना गया है। हरा रंग बुद्धि के विकास का प्रतीक है
इसके साथ ही यह बच्चे के आंतरिक विकास और सफलता को भी दिखता है। यह बच्चों की एकाग्रता को भी
बढ़ाने में मदद करता है। गुलाबी रंग ऊर्जा और समर्पण को दिखाता है। इस रंग से बच्चों में उत्साह और आगे
बढ़ने की चाहत बनी रहती है
● बच्चों के कमरे में कभी भी बहुत ज्यादा गहरे रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उन पर
नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी प्रकार से बच्चों के कमरे में बहुत ज्यादा कई तरह के भड़कीले रंगों का
भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कमरे में दरवाजों एवं खिड़कियों पर भी बहुत ज्यादा चमकीले और भड़कीले
रंगों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। बच्चों के कमरे में कोई भी हिंसक या डरावनी तस्वीर, पेंटिंग का भी इस्तेमाल
नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार से बच्चों के कमरे में पर्दों का रंग, दीवाल के रंग से थोड़ा गहरा अगर आप लेते हैं
तो यह अच्छा माना जाएगा।
● बच्चों के कमरे में किताबों को रखने की अलमारी की बात करें तो उसे पश्चिम दिशा में रखना चाहिए अगर
पश्चिम दिशा में सही जगह ना हो तो आप इसे दक्षिण की दीवार पर भी अलमारी बनाकर किताबों को रख
सकते हैं। इसके अलावा पढ़ाई करते समय बच्चे का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि पूर्व दिशा का
स्वामी सूर्य है और सूर्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच और उत्साह के साथ ही कुंडली के अनुसार आत्मा,
कॉन्फिडेंस और दशम भाव का भी कारक है, दशम भाव करियर का घर माना जाता है। अगर पूर्व दिशा में बैठने
की व्यवस्था न हो सके तो बच्चा पढ़ाई करते समय अपना मूंह उत्तर दिशा में या फिर उत्तर पूर्व दिशा की ओर
करके भी पढ़ाई कर सकता है। ऐसा करने से बच्चे को पढ़ाई में चीजो को समझने में आसानी होगी।
● बच्चों को अपने कमरे में माता सरस्वती और गणेशजी की फोटो भी लगानी चाहिए। इसके साथ ही अपनी
स्टडी टेबल पर वास्तु के आठ ग्रहों के ओरिजिनल रत्नों से युक्त एजुकेशन टावर और पूर्व दिशा में माणिक्य
रतन से युक्त सूर्य यंत्र एवं उत्तर दिशा में पन्ना रतन से युक्त बुध का वैदिक यंत्र भी स्थापित करना चाहिए।
बच्चों को प्रतिदिन माता सरस्वती और गणेश जी का भी ध्यान एवं स्तुति अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करने से
निश्चित रूप से बच्चे को अपनी एजुकेशन के माध्यम से जीवन में सफलता देखने को मिलेगी।
रसोईघर में किए जाने वाले रंग
घर में रसोई एक ऐसी जगह है जहां पर घर के लोगों के लिए भोजन बनता है और उस भोजन के माध्यम से वे
व्यक्ति स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहते हैं। वास्तु शास्त्र ऊर्जा चक्र के सिद्धांत पर आधारित है और वास्तु के
मुताबिक किचन से निकलने वाली ऊर्जा पूरे घर में फैलती है और घर के प्रत्येक सदस्य पर इसका प्रभाव भी
देखने को मिलता है। वास्तु के अनुसार घर में रसोई घर का उपयुक्त स्थान साउथ ईस्ट यानि कि अग्नि कोण
को माना गया है। इसलिए वास्तु के अनुसार रसोई घर में हल्के और सौम्य रंगों का चुनाव करना चाहिए। इन
रंगों से रसोई के साथ ही घर में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
● रसोई घर में आप सफेद रंग का प्रयोग कर सकते हैं, इसके अलावा ऑरेंज कलर, गुलाबी रंग करना भी काफी
शुभ माना जाएगा, इसके साथ ही रसोई घर में क्रीम कलर का भी प्रयोग कर सकते हैं। रसोई घर में कभी भी
डार्क रंग जैसे कि ब्लैक, सलेटी, डार्क ग्रीन, डार्क ब्राउन आदि रंग नहीं करवाने चाहिए।
● आजकल रसोईघर में काले पत्थर का प्रयोग काफी ज्यादा बढ़ गया है। इस पत्थर को सुंदरता के लिए काफी
ज्यादा इस्तेमाल किया जाने लगा है। वास्तु के अनुसार रसोई घर में काला पत्थर सही नहीं माना जाता। इस
काले पत्थर के कारण व्यक्ति को अपने घर में मानसिक अशांति और कई बीमारियां भी देखने को मिल सकती
है। रसोई घर में हरे रंग के पत्थर का प्रयोग काफी उपयुक्त माना जाता है। उपलब्ध न होने पर पीले रंग के
पत्थर का भी प्रयोग कर सकते हैं। अगर काला पत्थर पहले से लगा हुआ है और उसको हटाना संभव नहीं है तो
आप गैस चूल्हे के नीचे अगर हरे रंग का पत्थर लगा लेते हैं तो इससे भी आपको काफी राहत देखने को मिलेगी।
● इसी प्रकार से रसोई घर में गैस चूल्हा और सिलेंडर की व्यवस्था भी आग्नेय कोण में ही करनी चाहिए।
● रसोई घर में उत्तर पूर्व यानि कि ईशान कोण में मटके, आर ओ आदि पीने के लिए पानी की व्यवस्था करना
उचित माना जाता है। रसोई घर के कैबिनेट के लिए हल्का हरा और हल्का पीला रंग काफी शुभ माना जाएगा।
● रसोई घर मैं कभी भी बर्तन धोने की सिंक और गैस चूल्हे को रखने की व्यवस्था बहुत ज्यादा पास में नहीं
करनी चाहिए।
● रसोई घर के खिड़की और दरवाजे का रंग भी सफेद या फिर हल्का गुलाबी किया जा सकता है।
● इस प्रकार से वास्तु के अनुसार रसोई घर के रंग और अन्य चीजों की व्यवस्था करने पर निश्चित रूप से
स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा को लेकर घर- परिवार के लोगों में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।
वास्तु के अनुसार नव दंपति के कमरे का रंग
वास्तु शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की अभी कुछ समय पहले शादी हुई है उनको अपने बेडरूम में सकारात्मक
विचारों और आपसी सामंजस्य को बढ़ाने के लिए हल्के और सौम्य रंगों का प्रयोग करना चाहिए, इसके अलावा
और भी रंग है जिनके माध्यम से काफी सकारात्मक परिणाम और दांपत्य जीवन में भी खुशहाली दिखाई देती
है। बेडरूम में साफ, सफाई और चीजों को व्यवस्थित रखने के साथ ही वहां पर किए जाने वाले पेंट का भी
बेहतरीन दांपत्य जीवन में काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है।
● गुलाबी रंग- वास्तु के अनुसार बेडरूम में गुलाबी रंग दांपत्य जीवन में ऊर्जा और एक दूसरे के प्रति आकर्षण
देता है क्योंकि गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक है और यह मन को भी सुकून देता है। जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में
कुछ परेशानी चल रही है उनको गुलाबी रंग के साथ ही अपने बेडरूम में एक शुक्र का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र भी
स्थापित करना चाहिए। बेडरूम में किए जाने वाला गुलाबी रंग मन को स्थिर और रिश्तो को मजबूत बनाता है।
अगर पहले से कोई रंग हो रहा है तो आपको हल्के गुलाबी रंग की बेडशीट और गुलाबी रंग के पर्दों का प्रयोग
करना चाहिए।
● पीला रंग- बेडरूम में किया जाने वाला पीला रंग व्यक्ति के जीवन में संतोष और प्रफुल्लता का प्रतीक माना
जाता है। पीला रंग व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह रंग जीवन में
खुशी और शांति को भी बढ़ाता है। यदि आप पूरे कमरे में पीला रंग नहीं करना चाहते तो इसे आप दक्षिण-पूर्व
अथवा दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर भी कर सकते हैं। इस रंग से निश्चित ही आपके जीवन में खुशी, शांति और
सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
● सफेद रंग- बेडरूम में सफेद रंग काफी अच्छा रंग माना जाता है क्योंकि इस रंग के नकारात्मक प्रभाव नहीं
होते। सफेद रंग व्यक्ति को परिपूर्ण बनाता है और रिश्तो में मजबूती, पवित्रता और सामंजस्य को बढ़ाता है
साथ ही नव विवाहित दंपति के अंदर प्रेम और ऊर्जा का विकास करता है। यदि आप इसे अपने बेडरूम में अन्य
रंगों के साथ प्रयोग करना चाहते हैं तो आप सफेद रंग के साथ में गुलाबी और नारंगी रंग का प्रयोग कर सकते
हैं। इन रंगों का प्रयोग नव-दंपति के जीवन में प्रेम, स्थिरता और खुशहाली को बढ़ाने में सहयोग करेगा।
● नारंगी रंग- वास्तु के अनुसार बेडरूम में नारंगी रंग का प्रयोग व्यक्ति के उत्तम स्वास्थ्य और उच्च
महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। इस रंग का प्रयोग दक्षिण की दीवार पर करने से व्यक्ति के आत्मसम्मान और
जीवन के मूल्यों में वृद्धि देखने को मिलती है। जिन लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट और इच्छाओं की पूर्ति में
कमी या देरी हो रही है उनको अपने बेडरूम में इस रंग का प्रयोग दक्षिण की दीवाल पर अवश्य करना चाहिए
लेकिन जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह किसी पाप ग्रह यानि कि राहु, केतु, शनि या सूर्य से युक्त है तो
उनको अपने कमरे में लाल रंग और नारंगी रंग को करने से बचना चाहिए क्योंकि, इस रंग के कारण उनके
अंदर थोड़ी जल्दबाजी और गुस्सा भी देखने को मिल सकता है।
वास्तु के अनुसार घर में पर्दों का रंग
वास्तु शास्त्र में घर में किए जाने वाले रंगों के साथ ही पर्दों का रंग भी हमारे जीवन को काफी प्रभावित करता है।
घर में पर्दों की दिशाओं के अनुरूप बात करें तो-
● पूरब दिशा- में हल्के हरे रंग या फिर मिंट ग्रीन रंग के पर्दे लगाने चाहिए। हरे रंग के पर्दों को पूरब दिशा में
काफी शुभ माना जाता है और इनसे घर में माहौल भी काफी सकारात्मक बना रहता है।
● पश्चिम दिशा- आप अपने घर की पश्चिम दिशा में सफेद रंग के या फिर हल्के नीले अथवा हल्के ग्रे कलर के
भी पर्दे लगा सकते हैं। इस दिशा में सफेद रंग के पर्दे लगाने पर जीवन में शांति और उन्नति के साथ ही किए
जाने वाली मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलता है।
● उत्तर दिशा- घर की उत्तर दिशा में आपको हल्के नीले रंग के पर्दों का प्रयोग करना चाहिए। घर की इस दिशा
में नीले रंगों के परदे के प्रयोग से धन आगमन की स्पीड बढ़ती है और यदि कोई कर्ज है तो उसमें भी जल्दी ही
राहत देखने को मिलेगी।
● दक्षिण दिशा- दक्षिण दिशा में लाल रंग और गुलाबी रंग के पर्दों का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से
जीवन में उत्साह, रोमांस के साथ ही परिवार के सदस्यों में विश्वास और प्रेम बढ़ता है।
● ईशान कोण- घर के उत्तर-पूर्व दिशा में आपको सफेद रंग, हल्के नीले और हल्के हरे रंग के पर्दों का प्रयोग
करना चाहिए। ऐसा करने पर घर के सदस्यों में सामंजस्य और प्रेम में वृद्धि होगी।
● वायव्य कोण- घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में आपको हल्का हरा या हल्के नीले रंग के पर्दों का प्रयोग करना
चाहिए। ऐसा करने पर आपके घर के सदस्यों में मानसिक स्थिरता और विचारों में प्रगाढ़ता देखने को मिलेगी।
● आग्नेय कोण-घर के दक्षिण पूर्व के हिस्से में गुलाबी रंग के, पीले रंग के और हल्के लाल रंग के पर्दों का प्रयोग
करना चाहिए। ऐसा करने पर आपके घर के सदस्यों में उत्साह, ऊर्जा और कार्यों में प्रगति देखने को मिलेगी।
● नैऋत्य कोंण- घर के दक्षिण-पश्चिम के हिस्से में आपको पीले, सफेद या फिर हल्के लाल रंग के पर्दों का
प्रयोग करना चाहिए। यह कोण स्थिरता का प्रतीक है। यहां पर इन रंगों के प्रयोग से घर के सदस्यों में प्रेम,
सामंजस्य और विश्वास में वृद्धि होती है।
● बेडरूम- सामान्य रूप से बेडरूम में लगाए जाने वाले परदों की बात करें तो आपको हमेशा ही बेडरूम में
विचारों में समानता, रिश्तो में विश्वास और मजबूती के साथ में ही शांति और सुकून के लिए निश्चित रूप से
हल्के रंगों का प्रयोग करना चाहिए। आप गुलाबी, क्रीम, पीले और सफेद रंगों का प्रयोग कर सकते हैं। आपको
कभी भी बहुत ज्यादा गहरे या कई रंगों को मिक्स करके उनका प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि गहरे रंगों से
नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि और वैचारिक सामंजस्य में कमी देखने को मिलती है।
वास्तु के अनुसार घर के रंग और प्रतिनिधित्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार हम घर में जिन रंगों का प्रयोग अधिक मात्रा में करते हैं तो उन रंगों से संबंधित गुणों
की अधिकता भी हमें हमारे घर के सदस्यों में देखने को मिलती है। इसलिए रंगों का चुनाव काफी सोच,
समझकर करना चाहिए।
● लाल रंग- व्यक्ति के जीवन में लाल रंग उसके अंदर उत्साह, किसी कार्य को लेकर जुनून, उसकी शक्ति,
किसी भी व्यक्ति के प्रति उसकी भावनाएं और उसके अंदर जोश का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए घर में
लाल रंग का प्रयोग गलत जगह और बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए।
● नीला रंग- व्यक्ति के जीवन में नीला रंग उसके संतोष की भावना, नवीन कार्यों को करने के लिए उसका
उत्साह, उसके अंदर भक्ति की भावना, सत्य, निष्ठा और वस्तुओं के प्रति सौंदर्य को दर्शाता है। इसलिए नीले
रंग का प्रयोग वास्तु के अनुसार ही करना चाहिए।
● हरा रंग- व्यक्ति के जीवन में हरा रंग उसके विकास, उसके जीवन की समृद्धि, व्यक्ति की बुद्धि और उसके
ज्ञान के साथ ही उसकी बौद्धिक क्षमता को भी दर्शाता है। इसलिए हरे रंग का प्रयोग वास्तु के अनुसार करना
आवश्यक रहता है।
● काला रंग- वास्तु के अनुसार घर में काले रंग का प्रयोग बहुत ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह काला रंग
व्यक्ति के जीवन में उदासी और नकारात्मक विचारों को बढ़ावा देता है। इस रंग के प्रयोग से व्यक्ति सोचता
ज्यादा है लेकिन उन विचारों को कार्यों में ज्यादा बदल नहीं पाता, उसके अंदर नए कार्यों को करने के लिए
उत्साह में भी काफी कमी देखने को मिल सकती है।
● सफेद रंग- व्यक्ति के जीवन में सफेद रंग उसकी पवित्रता, उसके आचरण, विलासिता की और उसका झुकाव
या प्रेम एवं उसके खुले विचारों को दर्शाता है। सफेद रंग में नकारात्मक ऊर्जा का अभाव रहता है इसलिए इस
रंग की अधिकता घर में होने पर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि देखने को मिलती है।
● नारंगी रंग- घर में नारंगी रंग का प्रयोग करने से व्यक्ति के जीवन में आशा, उसके स्वस्थ विचार, अध्ययन
के प्रति रुचि और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। इसका प्रयोग दक्षिण और दक्षिण पूर्व में किया
जा सकता है।
● बैंगनी रंग- का प्रयोग घर में आर्थिक समृद्धि, भौतिकता, शालीनता और आराम देने वाली वस्तुओं के प्रति
झुकाव को दर्शाता है। इस रंग का वास्तु के अनुसार प्रयोग करने पर व्यक्ति के जीवन में सुख, सुविधाओं में
वृद्धि देखने को मिलती है।
कहां कौनसे रंगों से बचना चाहिए
वास्तु के अनुसार घर को डिजाइन करते और सजाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उस घर के अंदर ज्यादा
से ज्यादा प्राकृतिक रोशनी का आगमन हो सके। इस प्राकृतिक रोशनी के साथ में हल्के रंगों का प्रयोग आपको
अपने घर में निश्चित रूप से ही आराम, सुकून और शांति देगा। वास्तु में कुछ ऐसे रंग हैं जिनका प्रयोग गलत
दिशा या कोण में करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह धीमा हो सकता है।
● यदि कुंडली में राहु, शनि और मंगल जैसे क्रूर ग्रह खराब हो तो उस व्यक्ति को अपने घर में काले, ग्रे और
नीले रंग के साथ ही लाल रंग का भी बहुत ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इन रंगों का ज्यादा
इस्तेमाल करने से कुंडली के इन खराब- क्रूर ग्रहों का आपके ऊपर प्रभाव भी ज्यादा देखने को मिलेगा।
● रसोईघर में काले रंग की फ्लोरिंग नहीं करवानी चाहिए। रसोई में गैस चूल्हे के नीचे भी काले रंग के ग्रेनाइट
का प्रयोग नहीं होना चाहिए। रसोई घर में बहुत ज्यादा डार्क पेट भी नहीं कराना चाहिए। रसोई घर में नीले रंग
का भी प्रयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि यह रंग जलीय तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और रसोई घर में अग्नि
तत्व की प्रधानता होने के कारण वहां वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसी प्रकार से पूरे रसोई घर में लाल रंग
का प्रयोग करने पर भी वहां पर खाना बनाने वाले व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या देखने को मिल सकती है।
● वास्तु के अनुसार बेडरूम में गहरा लाल रंग, ग्रे कलर या काला रंग भी नहीं कराना चाहिए क्योंकि यह रंग कई
बार उग्रता और कई बार बिना वजह के नकारात्मक विचार और आपसी संबंधों में नीरसता भी दे सकते हैं।
बेडरूम में बहुत ज्यादा हरे रंग का प्रयोग करने पर भी आपसी रिश्तों में थोड़ी शिथिलता देखने को मिलती है।
● वास्तु के अनुसार स्टडी रूम में भी बहुत ज्यादा गहरे रंगों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इन
रंगों के कारण मानसिक स्थिरता और पढ़ाई में जोश को लेकर कमी देखने को मिलती है। स्टडी रूम में गहरे
नीले और लाल रंगों का अधिक प्रयोग किया जाए तो उन बच्चों में गुस्से और तनाव की मात्रा बढ़ सकती है।
● घर के गेराज और कार पार्किंग के एरिया में भी बहुत ज्यादा गहरे रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
घर में बहुत ज्यादा चमकीले रंगों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इन रंगों से भी मानसिक स्थिरता में
कमी और उग्रता की अधिकता देखने को मिल सकती है।
● वास्तु के अनुसार एंटी जोन में जाकर बहुत ज्यादा पीले रंग का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी
अधिकता से व्यक्ति के अंदर हाई बीपी और टेंशन के साथ ही कुछ चिड़चिड़ापन भी पैदा सकता है। इसी तरह से
यदि व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा- शनि से ग्रस्त या युक्त है और घर में नीले रंग का प्रयोग ज्यादा किया हो तो
ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को मानसिक परेशानी और व्यवहार में काफी नीरसता देखने को मिल सकती है।
● आप वास्तु के अनुसार घर में रंगों को कराइए, निश्चित रूप से आपको अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि
और स्थिरता के साथ ही उन्नति भी देखने को मिलेगी।
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🪶 डॉ योगेश व्यास, ज्योतिषाचार्य, (टापर),
नेट ( साहित्य एवं ज्योतिष ),
पीएच.डी (ज्योतिषशास्त्र)
मानसरोवर (जयपुर),
Website- www.astrologeryogesh.com
Mob- 8058169959